नव वर्षाभिनंदन २०१०
कालजयी कालरात्रि में, समय प्रहरियों का हुआ मिलन,
शुरू हो गया फिर से, हर्षातिरेक मधुर स्पन्दन।
बीते वर्ष २००९ में हुए, सुख दुख के बहुत आभास,
फिर से जाग उठी है, मन में एक नई आस।
स्वार्थों और हिंसाओं में, गुज़र गया वर्ष पुरातन,
आने वाले कल में तोड़ देंगे, ये सारे बन्धन।
राम रहीम का भेद मिटाएं, बन जाएं फिर से इंसान,
छुटपुट झगड़े मिट जाएं, बन जाए एक पहचान।
भीगी पलकों से विदा करें, हम यह वर्ष पुरातन,
आओ मिलजुल कर करें, हम नव वर्षाभिनंदन।
नववर्ष २०१० मंगलमय हो।
मधुर, नीलम, श्रेयांशी व श्रेयांश कुलश्रेष्ठ
गुना, म०प्र०
राम रहीम का भेद मिटाएं, बन जाएं फिर से इंसान, छुटपुट झगड़े मिट जाएं, बन जाए एक पहचान।
Monday, December 28, 2009
Friday, October 16, 2009
happy diwali
DEAR,
ES DIWALI PAR
EK DIYA JALAY APNE LIYE
EK DIYA JALAY PARIWAR KE LIYE
EK DIYA JALAY SAMAJ KE LIYE
EK DIYA JALAY DESH KE LIYE
EK DIYA JALAY VISHWA KE LIYE
KONA KONA ROSHAN HO
KOI GHAR NA RAHE KHALI
AISI MANAY DIWALI
HAPPY DIWALI
MADHUR KULSHRESHTHA
NEELAM, SHREYANSHI & SHREYANSH
GUNA
ES DIWALI PAR
EK DIYA JALAY APNE LIYE
EK DIYA JALAY PARIWAR KE LIYE
EK DIYA JALAY SAMAJ KE LIYE
EK DIYA JALAY DESH KE LIYE
EK DIYA JALAY VISHWA KE LIYE
KONA KONA ROSHAN HO
KOI GHAR NA RAHE KHALI
AISI MANAY DIWALI
HAPPY DIWALI
MADHUR KULSHRESHTHA
NEELAM, SHREYANSHI & SHREYANSH
GUNA
Sunday, March 8, 2009
holi
रंग रंगीली आई होली
खुशियों ढेरों लाई होली
राजा रंक सभी घर होली
पकवानों सी मीठी होली
बैर भाव भुलाए होली
सबको गले लगाए होली
तन मन स्वस्थ सहेजे होली
होली होली सबकी भाए होली
मस्त मस्त रंग रंगीली होली
Sunday, January 25, 2009
ek sawal anuttarit
एक सवाल-अभी भी अनुत्तरित
गणतंत्र दिवस पर हम गौरव महसूस करें।
पर क्या महसूस करें हजारों दैनिक मजदूरों के भूख दिवस पर ।
हम गौरव महसूस करें महात्मा पर ।
पर क्या महसूस करें दबी कुचली, लुटी पिटी महा-आत्माओं पर।
हम गौरव महसूस करें चाँद मिशन पर।
पर क्या महसूस करें लोगों की चाँद जैसी रोटी के मिशन पर।
हम गौरव महसूस करें स्लम डाग मिलेनियर पर।
पर क्या महसूस करें डाग की तरह दुत्कारे मिलेनियम स्लम्स पर।
हम गौरव महसूस करें बिड़ला,अम्बानी,मित्तल पर।
पर क्या महसूस करें भूखे नंगे धन्नो रामू और चंचल पर।
हम गौरव महसूस करें बढ़ती जी॰डी॰पी॰पर।
पर क्या महसूस करें इस जी॰डी॰पी॰(ग्लोबली डिस्ट्रीब्यूटिड पावर्टी) पर।
हम गौरव महसूस करें हमारे संविधान पर।
पर क्या महसूस करें शासक और शोषित के अपने अपने संविधानों पर।
हम गौरव महसूस करें अनेकता में एकता पर।
पर क्या महसूस करें एकता के अंदर सुलगती अनेकताओं पर।
फिर भी हम गौरव महसूस करें भारत की स्वतंत्रता सम्रद्धि एकता और विश्वास पर और आशान्वित रहें कि ये सब पहुँचेगीं जन जन तक-
जय भारत, जय हिन्द,
गणतंत्र दिवस पर हम गौरव महसूस करें।
पर क्या महसूस करें हजारों दैनिक मजदूरों के भूख दिवस पर ।
हम गौरव महसूस करें महात्मा पर ।
पर क्या महसूस करें दबी कुचली, लुटी पिटी महा-आत्माओं पर।
हम गौरव महसूस करें चाँद मिशन पर।
पर क्या महसूस करें लोगों की चाँद जैसी रोटी के मिशन पर।
हम गौरव महसूस करें स्लम डाग मिलेनियर पर।
पर क्या महसूस करें डाग की तरह दुत्कारे मिलेनियम स्लम्स पर।
हम गौरव महसूस करें बिड़ला,अम्बानी,मित्तल पर।
पर क्या महसूस करें भूखे नंगे धन्नो रामू और चंचल पर।
हम गौरव महसूस करें बढ़ती जी॰डी॰पी॰पर।
पर क्या महसूस करें इस जी॰डी॰पी॰(ग्लोबली डिस्ट्रीब्यूटिड पावर्टी) पर।
हम गौरव महसूस करें हमारे संविधान पर।
पर क्या महसूस करें शासक और शोषित के अपने अपने संविधानों पर।
हम गौरव महसूस करें अनेकता में एकता पर।
पर क्या महसूस करें एकता के अंदर सुलगती अनेकताओं पर।
फिर भी हम गौरव महसूस करें भारत की स्वतंत्रता सम्रद्धि एकता और विश्वास पर और आशान्वित रहें कि ये सब पहुँचेगीं जन जन तक-
जय भारत, जय हिन्द,
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