Sunday, January 25, 2009

ek sawal anuttarit

एक सवाल-अभी भी अनुत्तरित
गणतंत्र दिवस पर हम गौरव महसूस करें।
पर क्या महसूस करें हजारों दैनिक मजदूरों के भूख दिवस पर ।
हम गौरव महसूस करें महात्मा पर ।
पर क्या महसूस करें दबी कुचली, लुटी पिटी महा-आत्माओं पर।
हम गौरव महसूस करें चाँद मिशन पर।
पर क्या महसूस करें लोगों की चाँद जैसी रोटी के मिशन पर।
हम गौरव महसूस करें स्लम डाग मिलेनियर पर।
पर क्या महसूस करें डाग की तरह दुत्कारे मिलेनियम स्लम्स पर।
हम गौरव महसूस करें बिड़ला,अम्बानी,मित्तल पर।
पर क्या महसूस करें भूखे नंगे धन्नो रामू और चंचल पर।
हम गौरव महसूस करें बढ़ती जी॰डी॰पी॰पर।
पर क्या महसूस करें इस जी॰डी॰पी॰(ग्लोबली डिस्ट्रीब्यूटिड पावर्टी) पर।
हम गौरव महसूस करें हमारे संविधान पर।
पर क्या महसूस करें शासक और शोषित के अपने अपने संविधानों पर।
हम गौरव महसूस करें अनेकता में एकता पर।
पर क्या महसूस करें एकता के अंदर सुलगती अनेकताओं पर।
फिर भी हम गौरव महसूस करें भारत की स्वतंत्रता सम्रद्धि एकता और विश्वास पर और आशान्वित रहें कि ये सब पहुँचेगीं जन जन तक-
जय भारत, जय हिन्द,