नव वर्षाभिनंदन २०१०
कालजयी कालरात्रि में, समय प्रहरियों का हुआ मिलन,
शुरू हो गया फिर से, हर्षातिरेक मधुर स्पन्दन।
बीते वर्ष २००९ में हुए, सुख दुख के बहुत आभास,
फिर से जाग उठी है, मन में एक नई आस।
स्वार्थों और हिंसाओं में, गुज़र गया वर्ष पुरातन,
आने वाले कल में तोड़ देंगे, ये सारे बन्धन।
राम रहीम का भेद मिटाएं, बन जाएं फिर से इंसान,
छुटपुट झगड़े मिट जाएं, बन जाए एक पहचान।
भीगी पलकों से विदा करें, हम यह वर्ष पुरातन,
आओ मिलजुल कर करें, हम नव वर्षाभिनंदन।
नववर्ष २०१० मंगलमय हो।
मधुर, नीलम, श्रेयांशी व श्रेयांश कुलश्रेष्ठ
गुना, म०प्र०