Saturday, March 3, 2012

sachhi janseva - satire

awarded in rashtradharm magazine (consolation prize)

बदहवास भागते हुए नारद जी (स्वतंत्र मीडिया कर्मी) ने बैकुण्ठधाम (संसद भवन) में प्रवेश किया ‘‘प्रभो, प्रभो, बचाइए मुझे।’’
नारद जी की यह हालत देखते हुए भगवान जी (प्रधानमंत्री) मंद मंद मुस्कराते हुए मौन ही रहे।
कातर स्वर में नारद ने अपनी बात जारी रखी ‘‘भगवन, मैं पृथ्वीलोक (जनता) के हाल-चाल जानने के लिए गया था कि अफसरों, दलालों और देवगणों (सांसदों) को न जाने कैसे आभास हो गया। बस प्रभो, वे सब मुझे पकड़ने दौड़ पड़े। चिल्ला रहे थे ‘‘पकड़ो, पकड़ो, ये देखो हमारी बातें टेप करता है। बड़ी ही मुश्किल से जान बचा कर आ पाया हूँ।’’ अपनी एंटिना नुमा चोटी पर हाथ फेरते हुए नारद ने राहत की सांस ली। भगवान जी के बोलने से पहले ही वहाँ उपस्थित देवगणों ने हंगामा मचा दिया, ‘‘ प्रभो, ये नारद हमारी गुप्त बातों को सार्वजनिक कर पृथ्वीलोकवासियों (जनता) को गुमराह कर रहा है। यह अपनी अल्पबुद्धि से हमारी गूढ़ बातों का विश्लेशण करता है और पृथ्वीलोक पर अनर्गल बातें फैलाकर हमारी छवि खराब कर रहा है।’’
‘‘अब आप ही बताइए प्रभो- हमारे एक देवगण ने चारा न पचाया होता तो उसे खाकर हमारी कामधेनु शुद्ध दूध देती और पृथ्वीलोक को शुद्ध दूध मिलने से हजारों तरह की बीमारियाँ हो जातीं। जिसे ये नारद ‘चारा घोटाला, चारा घोटाला’ कह रहा है। वैसे प्रभो, हमारे देवगण अपनी फैक्ट्रियों में निर्मित दूध सप्लाई कर पृथ्वीलोकवासियों का पूरा ख्याल रख रहे हैं और उनके मोटापे को बढ़ने नहीं दे रहे हैं।’’
‘‘प्रभो, हमारे देवगणों ने कुछ सरकारी देवगणों (अफसरों) के साथ मिलकर, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का ध्यान रखते हुए विदेश से कुछ ऐसे हथियार मंगा लिए जिससे हमारे ‘अहिंसा धर्म’ का पालन भी होता रहे, दुश्मन को बंदर घुड़की भी मिल जाए और उनकी जान-माल का नुकसान भी न हो। उस नेक कार्य को इसने ‘बोफोर्स घोटाला’ कहकर पृथ्वीलोक को हमारे विरूद्ध भड़काने का षड़यंत्र रच डाला।’’
‘‘प्रभो, आप ही विचार कीजिए- हमारे देवगण ने खदानों से अर्जित कुछ हजार करोड़ अपने विदेशी खातों में जमाकर दो नेक काम किए। पहला विदेश की अर्थव्यवस्था सुधार ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का ध्यान रखते हुए किया। दूसरा अर्थशास्त्र के ‘डिमांड एण्ड सप्लाई’ के सिद्धांत का पालन कर, नोटों की सप्लाई कम कर, मुद्रास्फीति घटाने का काम किया, जिससे मंहगाई वृद्धि रुकी। अन्यथा पृथ्वीलोक मंहगाई डायन के शिकंजे में ही दम तोड़ देता।’’
‘‘प्रभो, आप एक और मुद्दा देखिए- हमारे एक सरकारी देवगण ने कुछ हजार एकड़ जमीन अपने आधिपत्य में लेकर जनता के बीच जमीन की मारामारी रोककर नेक काम किया है जिसे इसने ‘जमीन घोटाला’ कहकर हमें बदनाम किया है।’’
‘‘प्रभो, इसकी नादानी का एक और उदाहरण देखिए- हमने कॉमनवेल्थ गेम खिलाकर लाख-करोड़ की वेल्थ कॉमन कर ली तो इसे यह ‘कॉमनवेल्थगेम घोटाला’ कहकर दुष्प्रचारित कर रहा है। प्रभो, आप ही बताइए मात्र तेरह दिनों के खेल के लिए, मज़बूत स्टेडियम और मज़बूत सड़कों की क्या जरूरत है? क्या मज़बूत स्टेडियम में हमारे खिलाडि़यों के ज्यादा चोटें नही लगतीं?’’
‘‘प्रभो, हमारे देवगणों को क्या ये भी अधिकार नहीं है कि वे आदर्श सोसाइटी में अपने लिए आवास ले सकें। आखिर हम हैं तो जनसेवक और हमने सेवकों के आवास ले लिए तो इसने ‘आदर्श हाउसिंग घोटाला’ कहकर हमारी छवि खराब की है।’’
‘‘और प्रभो, अब तो हद हो गई है- हमारी एक अप्सरा ने अपने कार्य-कौशल से कुछ सौदे तय कराकर अपनी एवं देवलोक की भलाई की तथा पृथ्वीलोक को कुछ सस्ते में स्पेक्ट्रम दिला दिए जिससे फायदा पृथ्वी लोकवासियों को ही हुआ है। आज गरीब से गरीब के पास दो-दो, तीन-तीन मोबाइल हैं और वे कम रेट पर आपस में सुख-दुख बांट रहे हैं। इससे इसको जलन हो रही है। यह चाहता है कि संचार प्रणाली पर सिर्फ इसके एंटिना का ही आधिपत्य रहे। प्रभो, हमें इसका एंटिना काटना है।’’
‘‘प्रभो, आप ठंडे दिमाग से रिकार्ड देखकर निर्णय कीजिए कि हम कितनी मेहनत से काम कर रहे हैं। जनसेवा में कुछ करोड़ के हेरफेर से शुरू कर हमने लाखों हजार करोड़ की हेरफेर में महारत पा ली है। प्रभो, अब तो दैत्यगण (अपराधी) भी हमारी दोस्ती के लिए लालायित हो रहे हैं। वे भी प्रगति पथ में शामिल होना चाहते हैं। पर ये नारद, ‘‘पकड़ो इसे और निकाल फेंको।’’
हंगामा बढ़ते देख भगवान अपनी मुस्कराहट को छोड़कर कुछ कहने को तत्पर हुए कि जगत जननी, सर्वशक्तिमान, शक्तिस्वरूपा का इशारा पाकर पुनः मनमोहिनी के साथ मौन होकर बैठ गए।