भगवान चित्रगुप्त, देवर्षि नारद और ब्रह्मा जी के माथे पर चिंता की लकीरें उभर रहीं थीं। वे आपस में गहन मंत्रणा में डूबे हुए थे। उनके सामने आवेदनों का ढेर लगा हुआ था। हर पल आवेदन पर आवेदन आते जा रहे थे। हर आवेदन में एक ही मांग थी ‘प्रभो! हमें भैसें बना दो।’
भगवान चित्रगुप्त, देवर्षि नारद और ब्रह्मा जी बहुत चिंतित हो रहे हैं कि आखिर उनकी सबसे समझदार योनि मनुष्य को क्या हो गया है कि हर मनुष्य आत्मा पृथ्वी लोक पर भैंस बन कर जाना चाहती है।
आधुनिक मशीनों से सज्जित यमलोक में कम्प्यूटर पर बैठी अप्सरा ने आए हुए आवेदनों का विश्लेषण कर चित्रगुप्त जी को चैंकाया, ‘‘सर ये सारे आवेदन एक खास प्रदेश से आई हुई आत्माओं के हैं, विशेषकर एक विशेष नगर से आई हुई आत्माओं के।’’
कम्प्यूटर गणिका की बात सुनकर चित्रगुप्त जी परेषान हो उठे कि आखिर खास प्रदेश की जनता को क्या हो गया है जो सर्वश्रेष्ठ मनुष्य योनि को त्यागकर भैंस बनना चाहती है। जबकि हर आत्मा मनुष्य योनि में जाने को लालायित रहती है क्योंकि मनुष्य योनि में ही प्राणी को बुद्धि और विवके प्राप्त होता है जिससे वह योग और भोग को अपने अपने हिसाब से प्राप्त करता रहता है।
चित्रगुप्त जी की चिंता को भांपते हुए देवर्षि नारद बोले ‘‘प्रभू में पृथ्वीलोक पर जाकर इसका पता लगाता हूँ।’’
‘‘हाँ हाँ देवर्षि, आप शीघ्र जाकर पता लगाइए। हमें इन आवेदनों का तुरंत निपटारा करना है अन्यथा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत हम पर कार्रवाई हो सकती है।’’
नारद जी तुरंत यात्रा पर निकल पड़े। अदृष्य होकर विशेष नगर पहुँच गए और दिव्य दृष्टि से देखने लगे। कड़कड़ती ठंड में लोग तंबुओं में रह रहे हैं। बच्चे और बूढ़े लगभग नंगे बदन ठिठुर रहे हैं। उनके पास ओढ़ने के लिए पर्याप्त कंबल और पहनने के लिए गर्म कपड़े नहीं हैं। खाने के लिए भरपेट भोजन भी नहीं है।
उनकी दिव्य दृष्टि घूमी, उन्होंने देखा कि वातानुकूलित तबेले में भैंसें आराम से बैठी पगुरा रहीं हैं। उनके सामने मध्यान्ह भोजन के लिए आया हुआ उत्तम क्वालिटी का पोषण आहार रखा हुआ है जिसे खाकर वे हृष्ट-पुष्ट हो रहीं हैं। सेवक लोग स्वयं हड्डियों का ढांचा बनकर भैंसों की सेवाकर उन्हें तंदुरुस्त बनाने में जुटे हैं।
तभी उनकी दिव्य दृष्टि ने देखा कि तबेले से भैंसें गायब हो गई हैं। तबेले में हड़कम्प मच गया है। महकमें के आला पुलिस अफसरों का वहाँ जमघट लग गया है। सभी के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं। स्निफर डॉग स्क्वाड सूंघ सूंघ कर इधर उधर दौड़-भाग कर अपहरण कर्ताओं का पता लगा रहा है। पूरा प्रशासन सारा महत्वपूर्ण प्रशासनिक काम रोककर, भैंसों के अपहरण की गुत्थी सुलझाने में लगा हुआ है।
पुलिस महकमें ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए चैबीस घंटे में अपहरण का पर्दाफाश कर दिया और भैंसें तबेले में वापस पहुँच गईं।
तबेले का मालिक भैंसों के गले में लिपट कर कह रहा है ‘‘हमारी भैंसें विक्टोरिया से कम नहीं हैं।’’
दिव्य दृष्टि फुटपाथों, सड़कों पर घूमी। चारों तरफ भूख गरीबी अपना तांडव मचा रही है वहीं एक मेले में सरकार हीरोइनों को नचा रही है। तबेलों में जानवर पोषण आहार खा रहे हैं वहीं स्कूलों में सड़ा हुआ मध्यान्ह भोजन खाकर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।
अचानक देवर्षि ने देखा कि एक गरीब व्यक्ति आला पुलिस अफसर के पैरों को अपने आंसुओं से भिगोता हुआ गिड़गिड़ा रहा है ‘‘साब एक साल हो गया मेरी लड़की को गायब हुए। साब कुछ तो पता लगा दो कि मेरी लड़की को कौन ले गया है वह अब जिंदा है या मार दी गई है।’’
अफसर दहाड़ रहा है ‘‘तुम्हें तो कोई काम है नहीं। हम लोग फालतू बैठे हैं क्या? पता लगा रहे हैं। पता चलते ही तुम्हें बता देंगे।’’
फिर मन ही मन बड़बड़ा रहा है ‘खोजी कुत्ते भी सूंघ सूंघ कर हार गए उन्हें घर से गरीबी की बू के अलावा कोई बू नहीं मिली। वे चारों तरफ फैली गरीबी की बू में कन्फ्यूज्ड होकर रह गए। अब उस लड़की का पता कैसे लगाएं।’
पूरा प्रदेश तबेला बना हुआ है। अस्पतालों में डाक्टर पिट रहे हैं। दफ्तरों में अफसरों से झूमा-झटकी हो रही है। स्कूलों में मास्टरों से बदतमीजी हो रही है। महिलाओं और लड़कियों को सरेआम प्राकृतिक अवस्था में पहुँचाया जा रहा है। बंदूको की गोलियों से बच्चों के कंचों की तरह खेला जा रहा है। दबंग लोग आम आदमी को भेड़ों की तरह हाँक रहे हैं। पुलिस भेड़ों की जगह भेडि़यों की रक्षा में लगी है।
देवर्षि यह माहौल देखकर घबरा गए। तुरंत ही नारायण नारायण की जगह भैंस भैंस कहते हुए वापस चल दिए। वापसी में एक आत्मा जिसकी अभी अभी गोली मारकर हत्या उसके ही नेता ने कर दी थी नारद जी के साथ चिपक ली।
यमलोक में आवेदनों के ढेर में दबे हुए भगवान चित्रगुप्त और ब्रह्मा जी को मुष्किल से ढूंढ कर नारद जी कुछ बयान करते उससे पहले ही साथ आई आत्मा बोल पड़ी ‘‘बना दो बना दो, प्रभो! सारी जनता को किसी मंत्री की भैंसें बना दो ताकि उन्हें भी भोजन पानी और सुरक्षा तो मिल सके।’’
