Monday, February 7, 2011

basant

शुभदा बसंतपंचमी

दूर कहीं से कोयल बोली,
कानों में मिसरी सी घोली।
भौरों की गुन गुन,
तितली की चंचल,
चितवन से डाली डाली डोली।
ठंड से ठिठुरते हुए,
मौसम ने ली अंगड़ाई
अलसाए सूरज ने आँखे खोली।
चटकने लगी धूप सुनहरी,
पीली पीली सरसों फूली।
लाल लाल पलाश दहका,
महुआ की डाली डाली झूली।
सतरंगी छटा से सज गयी,
जंगल और बागों में रंगोली।
-मधुर

सुन्दर वसन पहन आया रे पावन बसंत।
देखो देखो कैसे रिझाए रे मन भावन बसंत।।
मधुमय सुरभित वन उपवन सारे।
फूली सरसों खेत हुए पीले सारे।।
नयनों को सुख दें ऒ साथी आ रे।
सज गयी फुलवारी आ देख नजा़रे।।
भंवरों से गुंजित ये है प्यारा बसंत।
देखो देखो कैसे रिझाए रे मन भावन बसंत।।
माघ बीत गया फागुन मदमाता।
इतराता इठलाता जैसे मौर सजाता।।
कोकिल कूक स्वर मन को लुभाता।
सजतीं मंजरियाँ रसाल बौराता।
भीनी भीनी सुरभि फैलाए रे मादक बसंत।
देखो देखो कैसे रिझाए रे मन भावन बसंत।।

-नीलम

Monday, December 28, 2009

happy new year

नव वर्षाभिनंदन २०१०
कालजयी कालरात्रि में, समय प्रहरियों का हुआ मिलन,
शुरू हो गया फिर से, हर्षातिरेक मधुर स्पन्दन।
बीते वर्ष २००९ में हुए, सुख दुख के बहुत आभास,
फिर से जाग उठी है, मन में एक नई आस।
स्वार्थों और हिंसाओं में, गुज़र गया वर्ष पुरातन,
आने वाले कल में तोड़ देंगे, ये सारे बन्धन।
राम रहीम का भेद मिटाएं, बन जाएं फिर से इंसान,
छुटपुट झगड़े मिट जाएं, बन जाए एक पहचान।
भीगी पलकों से विदा करें, हम यह वर्ष पुरातन,
आओ मिलजुल कर करें, हम नव वर्षाभिनंदन।
नववर्ष २०१० मंगलमय हो।
मधुर, नीलम, श्रेयांशी व श्रेयांश कुलश्रेष्ठ
गुना, म०प्र०

Friday, October 16, 2009

happy diwali

DEAR,

ES DIWALI PAR
EK DIYA JALAY APNE LIYE
EK DIYA JALAY PARIWAR KE LIYE
EK DIYA JALAY SAMAJ KE LIYE
EK DIYA JALAY DESH KE LIYE
EK DIYA JALAY VISHWA KE LIYE
KONA KONA ROSHAN HO
KOI GHAR NA RAHE KHALI
AISI MANAY DIWALI


HAPPY DIWALI

MADHUR KULSHRESHTHA
NEELAM, SHREYANSHI & SHREYANSH
GUNA

Sunday, March 8, 2009

holi

रंग रंगीली आई होली

खुशियों ढेरों लाई होली

राजा रंक सभी घर होली

पकवानों सी मीठी होली

बैर भाव भुलाए होली

सबको गले लगाए होली

तन मन स्वस्थ सहेजे होली

होली होली सबकी भाए होली

मस्त मस्त रंग रंगीली होली

Sunday, January 25, 2009

ek sawal anuttarit

एक सवाल-अभी भी अनुत्तरित
गणतंत्र दिवस पर हम गौरव महसूस करें।
पर क्या महसूस करें हजारों दैनिक मजदूरों के भूख दिवस पर ।
हम गौरव महसूस करें महात्मा पर ।
पर क्या महसूस करें दबी कुचली, लुटी पिटी महा-आत्माओं पर।
हम गौरव महसूस करें चाँद मिशन पर।
पर क्या महसूस करें लोगों की चाँद जैसी रोटी के मिशन पर।
हम गौरव महसूस करें स्लम डाग मिलेनियर पर।
पर क्या महसूस करें डाग की तरह दुत्कारे मिलेनियम स्लम्स पर।
हम गौरव महसूस करें बिड़ला,अम्बानी,मित्तल पर।
पर क्या महसूस करें भूखे नंगे धन्नो रामू और चंचल पर।
हम गौरव महसूस करें बढ़ती जी॰डी॰पी॰पर।
पर क्या महसूस करें इस जी॰डी॰पी॰(ग्लोबली डिस्ट्रीब्यूटिड पावर्टी) पर।
हम गौरव महसूस करें हमारे संविधान पर।
पर क्या महसूस करें शासक और शोषित के अपने अपने संविधानों पर।
हम गौरव महसूस करें अनेकता में एकता पर।
पर क्या महसूस करें एकता के अंदर सुलगती अनेकताओं पर।
फिर भी हम गौरव महसूस करें भारत की स्वतंत्रता सम्रद्धि एकता और विश्वास पर और आशान्वित रहें कि ये सब पहुँचेगीं जन जन तक-
जय भारत, जय हिन्द,

Tuesday, December 30, 2008

HAPPY NEW YEAR 2009

नव वर्ष की हार्दिक बधाईयाँ
२००९
नया साल नया साल
लाए खुशियाँ हर हाल
सुख शांति हो जीवन में
मुबारक हो नया साल

Thursday, December 20, 2007

lost childhood

जन्म लेता है एक इंसान
और मौत होती है
हिन्दू या मुसलमान की
पर इस बीच
कितनी ही बार मौत होती है
इंसान की ।।

खोता बचपन
=========

मेरे होश संभालने से लेकर
आज होश गड़बड़ाने तक
कितनी बदल गई है दुनियाँ,
जंगल अब खिलखिलाते नहीं हैं
पेड़ पहले जैसे बौराते नहीं हैं
गाएं रंभाती नहीं हैं
और चिड़ियाँ चहचहाती नहीं हैं।

वयस्क तो वयस्क
अब बच्चे भी ठहठहाते नहीं हैं
कितनी बोझिल हो गई है जिंदगी

अगर यह सब यूँ ही चलता रहा
तो एक दिन
बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल हो जाएगा
मुस्कुराना और ठहठहाना।

जगह जगह खुल जाएंगी
प्रयोगशालाएं और व्यायामशालाएं
जहाव
व्यावसायिकता भरे अंदाज में
विशेषग्यता के दर्प से दमकते हुए
विशेषग्य
सिखाएगें वैग्यानिक ढंग से मुस्कुराना
मुँह खुलने की नाप से लेकर
दाँत दिखाने तक की गिनती लिखी होगी फार्मूलों के रूप में।।